शब्द मंदिर मासिक पत्रिका का हुआ विमोचन…

साहित्यिक पत्र -पत्रिकाएं दीप स्तंभ की तरह हमारा मार्ग उजियारे से भरती हैं – भगवानदास सबनानी
संपादक का काम चुनौतीपूर्ण होता है – डॉ. विकास दवे
भोपाल, सं. प्रशांत झिलपे – संपादक का काम चुनौतीपूर्ण पूर्ण होता है संपादक को रचना चयन करते समय निर्मम होना चाहिए , आज साहित्य जगत में एक महत्वपूर्ण पत्रिका ‘ शब्द मंदिर ‘ अपने सृजकों पाठकों के मध्य आ रही है, पत्रिका की सफलता हेतु अग्रिम शुभकामनाएं और बधाई। यह उदगार हैं डॉ. विकास दवे मंत्री संचालक मध्यप्रदेश राष्ट्रभाषा प्रचार समिति हिंदी भवन भोपाल के जो लघुकथा शोध केंद्र समिति भोपाल के हिंदी भवन स्थित कार्यालय सभागार में ‘शब्द मंदिर ‘ पत्रिका के विमोचन कार्यकम समारोह की अध्यक्षता करते हुए बोल रहे थे |
आयोजन के मुख्य अतिथि भगवानदास सबनानी विधायक ने कहा कि साहित्यिक पत्र पत्रिकाएं हमारे लिए दीप स्तंभ है, आज का दिन साहित्य संस्कृति के लिए महत्वपूर्ण है आज एक पत्रिका का जन्म हो रहा है पत्रिका दीर्घजीवी हो और अपने लक्ष्य को पाने में सफल हो। सारस्वत अतिथि रघुनंदन शर्मा पूर्व सांसद एवं कार्याध्यक्ष मानस भवन भोपाल ने कहा कि ‘शब्द मंदिर’ पत्रिका अपने नाम को सार्थक करते हुए साहित्य में संस्कृति राष्ट्रप्रेम आचरण में शुचिता की प्रतिनिधि पत्रिका बने।
आयोजन में कांता रॉय निदेशक लघुकथा शोध केंद्र समिति भोपाल ने कहा कि नवीन पत्रिका साहित्य संस्कृति कला और पर्यावरण को दिशा देने में महत्वपूर्ण भूमिका अदा करेगी। पत्रिका की प्रधान संपादक स्नेहलता बरुआ ने कहा कि – पत्रिका का आधार उसके पाठक और लेखक होते हैं हम उनकी अपेक्षाओं पर खरा उतरने के लिए प्रतिबद्ध हैं।
कार्यक्रम का संचालन वरिष्ठ साहित्यकार घनश्याम मैथिल अमृत ने किया और अंत में आभार पत्रिका के संपादक राजकुमार बरुआ ने प्रकट किया।
आयोजन में डॉ. गौरीशंकर शर्मा गौरीश, डॉ, रामवल्लभ आचार्य, राजेंद्र गट्टानी, डॉ. सुधा दुबे, सुनील दुबे वृक्षमित्र , डॉ. वर्षा ढोबले, अशोक निर्मल, सुनील चतुर्वेदी, मनोज जैन मधुर, आनंद कुमार तिवारी सहित अनेक साहित्यकार उपस्थित थे।



