मध्य प्रदेश

मुख्यमंत्री एंव प्रदेश अध्यक्ष की प्रदेश कार्यालय में पत्रकार-वार्ता, संवैधानिक संस्थाओं पर सवाल उठाना उचित नहीं – मुख्यमंत्री डॉ. यादव

भोपाल, सं. प्रशांत झिलपे –  मुख्यमंत्री डॉ.मोहन यादव एवं भारतीय जनता पार्ट के प्रदेश अध्यक्ष व विधायक हेमंत खण्डेलवाल ने रविवार को भाजपा प्रदेश कार्यालय में पत्रकार-वार्ता को संबोधित किया। मुख्यमंत्री डॉ.मोहन यादव ने कहा कि संवैधानिक संस्थाओं पर सवाल उठाना उचित नहीं है। राजनीतिक असफलता का ठीकरा कांग्रेस और विपक्ष संवैधानिक संस्थाओं पर फोड़ रहा है। कैबिनेट सेक्रेटरी को भेजे गए पत्र को लेकर भी विपक्ष द्वारा भ्रम फैलाया गया। चुनाव आयोग की ओर से स्पष्ट किया गया है कि यह पत्र किसी नीतिगत विषय अथवा एसआईआर से संबंधित नहीं था, बल्कि प्रतिनियुक्ति पर आए एक अधिकारी की प्रशासनिक कार्यप्रणाली से संबंधित आंतरिक मामला था। चुनाव आयोग को लेकर भ्रम फैलाने पर राहुल गांधी को माफी मांगकर इस्तीफा देना चाहिए, क्योंकि चुनाव आयोग के संयुक्त बयान से कांग्रेस के झूठ और भ्रम की राजनीति बेनकाब हो गई है। हर पात्र नागरिक का मताधिकार सुनिश्चित करना आयोग की प्राथमिकता में शामिल रहता है। भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष व विधायक श्री हेमंत खण्डेलवाल ने कहा कि राहुल गांधी हार की हताशा में संवैधानिक संस्थाओं को बदनाम करने की राजनीति कर रहे हैं। एसआईआर पर सुप्रीम कोर्ट के आदेश और चुनाव आयोग के स्पष्टीकरण से कांग्रेस के दुष्प्रचार का सारा खेल फेल हो गया है। राहुल गांधी और कांग्रेस एंटी-बीजेपी नहीं, एंटी-नेशनल बातें करते हैं। कांग्रेस लोकतंत्र की मर्यादा को बार-बार लांघने का काम कर रही है और कांग्रेस को आत्ममंथन करना चाहिए कि जनता उसे लगातार क्यों नकार रही है।

बड़े राजनीतिक परिवार में जन्म लेना किसी के प्रति अपमानजनक भाषा के प्रयोग का अधिकार नहीं देता

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने पत्रकार वार्ता में कांग्रेस और नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी द्वारा निर्वाचन आयोग तथा चुनाव प्रक्रिया को लेकर लगाए जा रहे आरोपों पर तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा कि भारत दुनिया का सबसे बड़ा लोकतंत्र और दुनिया का सबसे युवा देश है। लोकतंत्र को मजबूत बनाए रखना केवल सरकार की नहीं, बल्कि विपक्ष की भी समान जिम्मेदारी है। लेकिन जिस तरह नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी संवैधानिक संस्थाओं पर हमेशा प्रश्नचिन्ह लगा रहे है वह लगातार लोकतंत्र को कमजोर कर रहे हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि राजनीतिक असहमति लोकतंत्र का स्वाभाविक हिस्सा है, लेकिन असहमति के नाम पर संवैधानिक संस्थाओं और सार्वजनिक जीवन से जुड़े व्यक्तियों के प्रति अमर्यादित भाषा का इस्तेमाल स्वीकार नहीं किया जा सकता। उन्होंने कहा कि किसी बड़े राजनीतिक परिवार में जन्म लेना किसी को भी किसी के प्रति अपमानजनक भाषा के प्रयोग का अधिकार नहीं देता।

कांग्रेस संवैधानिक संस्थाओं को नहीं मानती

मुख्यमंत्री डाॅ. मोहन यादव ने कहा कि इलाहाबाद हाईकोर्ट के फैसले के बाद पीएम इंदिरा गांधी द्वारा सीधे देश पर आपातकाल थोपा गया था, ये इस बात का प्रमाण है कि कांग्रेस पार्टी संवैधानिक संस्थाओं को नहीं मानती थी और आज भी नहीं मानती है। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी ने सर्जिकल स्ट्राइक पर सवाल खड़ा किया, वहीं चैकीदार चोर कहकर अभद्र भाषा का इस्तेमाल किया। उन्होंने सारी सीमाओं को तोड़ने का काम किया है। लगातार इस तरह के बेबुनियाद आरोप लगाकर अंत में राहुल गांधी न्यायालय में माफी मांग लेते हैं।

निर्वाचन आयोग अपनी संवैधानिक भूमिका निभा रहा

मुख्यमंत्री डाॅ. मोहन यादव ने कहा कि एक ही प्रक्रिया को अलग-अलग राज्यों में अलग-अलग नजरिए से देखने से कांग्रेस की मंशा पर प्रश्न खड़े होते हैं। उन्होंने कहा कि कांग्रेस को केरल में सत्ता मिल गई तो एसआईआर सही थी, हिमाचल में सत्ता मिली तो सही थी, वहीं तमिलनाडु में 50 साल से सत्ता से बाहर है, वहां भाजपा नहीं डीएमके और एआईडीएमके वर्षों से है, वहीं बंगाल में वामपंथियों का कब्जा रहा, तब एसआईआर को लेकर राहुल गांधी मौन क्यों रहे। उन्होंने कहा कि पात्र नागरिकों को मताधिकार सुनिश्चित करने तथा मतदाता सूची को अधिक व्यवस्थित और पारदर्शी बनाने की प्रक्रिया में निर्वाचन आयोग अपनी संवैधानिक भूमिका निभा रहा है। उन्होंने कहा कि निर्वाचन आयोग के निर्णयों को लेकर यदि किसी राजनीतिक दल को आपत्ति है तो संवैधानिक और न्यायिक रास्ते खुले हैं। उन्होंने कहा कि कांग्रेस लोकतांत्रिक संस्थाओं के प्रति विश्वास बनाए रखे और राजनीतिक मतभेदों को संस्थाओं के विरोध में परिवर्तित न करे।

कांग्रेस सत्ता से बाहर रहने का कारण बौखलाई हुई है, इसलिए वे लगातार निंदनीय कृत्य कर रही है

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि लोकतंत्र में जनता सबसे बड़ी निर्णायक शक्ति है। राजनीतिक दलों के आरोप-प्रत्यारोप के बीच जनता सभी घटनाक्रमों को नजदीक से देख रही है। उन्होंने कहा कि विपक्ष की भूमिका सरकार से सवाल पूछने की है, लेकिन साथ ही लोकतांत्रिक संस्थाओं की गरिमा और संवैधानिक व्यवस्था को मजबूत बनाए रखने की जिम्मेदारी भी विपक्ष की है। भाजपा ने जनसंघ से लेकर आज तक देश और जनहित में सदैव लड़ती रही। आपातकाल के खिलाफ भी भाजपा खड़ी रही। कांग्रेस सत्ता से बाहर रहने का कारण बौखलाई हुई है, इसलिए वे लगातार निंदनीय कृत्य कर रही है। जनता उनके झूठ को बहुत करीब से देख रही है, अब उनका झूठ फिर से बेनकाब हुआ है।

राहुल गांधी अपने बयान पर देश से मांगे माफी…

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि देश के पात्र नागरिकों को मताधिकार देने और लोकतंत्र की शक्ति के लिए हम सभी चुनाव आयोग के साथ हैं। अब तो अमेरिका के राष्ट्रपति ट्रम्प भारत की चुनाव प्रणाली को अपनाने पर जोर दे रहे हैं। ऐसे में दुर्भाग्य की बात है कि राहुल गांधी ने ईवीएम को ब्लैक बॉक्स और ईडी को ठगबंधन करार दिया था। इस तरह से उनके मजाक राहुल गांधी को भारी पड़ेंगे, उन्हें इस तरह के बयान पर माफी मांगना चाहिए। उन्होंने कहा कि एसआईआर को लेकर राहुल गांधी ने दो बार कोर्ट से मुंह की खाई है। जिस प्रकार से मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार और दोनों चुनाव आयुक्तों को लेकर राहुल गांधी ने जो भ्रम फैलाने का काम किया है, वह अक्षम्य है। उन्होंने कहा कि एक तरफ एनडीए का गठबंधन है, वहीं दूसरी ओर इंडी गठबंधन है, अखिलेश यादव रायबरैली जाते हैं, तो राहुल गांधी कहते हैं कि हम भी सेफई जा सकते हैं। ऐसे में इनसे अपना कुनबा संभल नहीं रहा है।

राहुल गांधी की राजनीति, संवैधानिक संस्थाओं को बदनाम करने का प्रयास – हेमंत खण्डेलवाल

भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष व विधायक हेमंत खण्डेलवाल ने कहा कि कांग्रेस अपनी राजनीतिक असफलताओं से लोगों का ध्यान भटकाने के लिए जनता के मन में भ्रम और अविश्वास पैदा करने का प्रयास कर रही है। लेकिन अब चुनाव आयोग ने स्वयं इस पूरे मामले पर स्पष्ट स्थिति सामने रख दी है। 26 सितम्बर को चुनाव आयोग की बैठक हुई और यह स्पष्ट किया गया कि देश भर में चल रही एसआईआर किसी एक व्यक्ति का निर्णय नहीं, यह मुख्य चुनाव आयुक्त और दोनों चुनाव आयुक्तों द्वारा सर्वसम्मति से लिया गया निर्णय है, ऐसे में राहुल गांधी और कांग्रेस किस आधार पर इस मुद्दे को लेकर भ्रम फैला रहे हैं। उन्होंने कहा कि यह पहली बार नहीं है कि जब कांग्रेस और राहुल गांधी द्वारा किसी संवैधानिक संस्था की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाये गये हों। राहुल गांधी ने 2024 में ईवीएम को ब्लेक बाॅक्स बताकर लोकतांत्रिक प्रक्रिया पर सवाल उठाया, वहीं 2019 में न्यायपालिका पर और 2016-2022 में सर्जिकल स्ट्राइक पर सवाल उठाकर विदेशों में भारतीय लोकतंत्र को कठघरे में खड़े करने का काम किया। खण्डेलवाल ने कहा कि तमिलनाडु में 1967 के बाद कांग्रेस सत्ता से बाहर है। पश्चिम बंगाल में 1977 के बाद से कांग्रेस सत्ता में नहीं रही, वहीं उत्तर प्रदेश में 1989 और बिहार में 1990 के बाद तीन दशकों से अधिक समय से जनता ने कांग्रेस को जनादेश से दूर रखा है। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में सरकार या किसी संवैधानिक संस्था के निर्णय से असहमति रखने का अधिकार सभी को है, लेकिन असहमति व्यक्त करने और संवैधानिक संस्थाओं की विश्वसनीयता पर सवाल खड़े करने के बीच अंतर को हमें समझने की आवश्यक है।

कांग्रेस बताए, क्या उसे सुप्रीम कोर्ट और चुनाव आयोग की विश्वसनीयता पर भरोसा नहीं?

भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खण्डेलवाल ने कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में प्रत्येक राजनीतिक दल और नेता से अपेक्षा रहती है कि वह अपने मतभेदों और आलोचनाओं को तथ्यों तथा संवैधानिक प्रक्रियाओं के दायरे में रखे। कांग्रेस बार-बार लोकतंत्र की मर्यादाओं को लांघने का काम कर रही है और चुनाव आयोग तथा सुप्रीम कोर्ट जैसी संवैधानिक संस्थाओं की विश्वसनीयता पर सवाल उठा रही है। कांग्रेस को स्पष्ट करना चाहिए कि क्या उसे सुप्रीम कोर्ट और चुनाव आयोग जैसी संवैधानिक संस्थाओं पर भरोसा नहीं है? जब चुनाव आयोग ने अपने निर्णयों और प्रक्रियाओं को लेकर स्थिति स्पष्ट कर दी है, तब भी कांग्रेस द्वारा भ्रम फैलाने का प्रयास किया जा रहा है। कांग्रेस को यह आत्ममंथन करना चाहिए कि जनता उसे लगातार क्यों नकार रही है और इसके लिए उसे अपने नेतृत्व, संगठन तथा कार्यप्रणाली में क्या बदलाव करने की आवश्यकता है।

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