भोपाल: शैक्षिक डेटा के प्रमुख स्त्रोत यूडाईस और प्रदर्शन ग्रेडिंग सूचकांक विषयों पर तीन दिवसीय कार्यशाला में डेटा-आधारित शैक्षिक सुधारों पर जोर…

भोपाल, सं. प्रशांत झिलपे – विद्यालयों से प्राप्त डेटा अब केवल रिकॉर्ड तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि शिक्षा व्यवस्था की जरूरतों की पहचान संसाधन नियोजन और गुणवत्ता सुधार की कार्ययोजनाओं का आधार बनेगा। यूडाइज प्लस एवं पीजीआई इंडेक्स 2025-26 की तीन दिवसीय उन्मुखीकरण कार्यशाला में डेटा की शुद्धता, प्रमाणिकता और समयबद्ध अद्यतन को प्रभावी शैक्षिक नियोजन के लिए महत्वपूर्ण बताया गया।
राज्य शिक्षा केंद्र, स्कूल शिक्षा विभाग, मध्यप्रदेश द्वारा शिक्षा मंत्रालय, भारत सरकार, यूनिसेफ एवं एनआईसी के सहयोग से 21 से 23 सितंबर तक आरसीवीपी नरोन्हा प्रशासन अकादमी, भोपाल में आयोजित कार्यशाला में राज्य एवं जिला स्तर के अधिकारियों को यूडाइज प्लस में डेटा प्रविष्टि, सत्यापन एवं प्रबंधन तथा पीजीआई और पीजीआई-डी के माध्यम से शैक्षिक प्रदर्शन के विश्लेषण की जानकारी दी गई।
सचिव, स्कूल शिक्षा विभाग डॉ. संजय गोयल ने कार्यशाला में सहभागी शिक्षा विभाग के मैदानी अधिकारियों को संबोधित करते हुए कहा कि, आज शिक्षा व्यवस्था में बेहतर योजना निर्माण, संसाधनों के प्रभावी उपयोग और निरंतर सुधार के लिए विश्वसनीय आंकड़ों की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। जब आंकडों की और उनके विश्लेषण की बात हो तो UDISE + और PGI इंडेक्स को समझना और उनका प्रभावी उपयोग सभी मैदानी अधिकारियों के लिए आवश्यक है।
सचिव डॉ. गोयल ने शैक्षणिक प्रबंधन में डेटा की भूमिका को रेखांकित करते हुए जिला अधिकारियों से उपलब्ध आंकड़ों को केवल रिपोर्टिंग तक सीमित न रखते हुए विद्यालयों की वास्तविक आवश्यकताओं को समझने और सुधार की दिशा तय करने में उपयोग करने का आह्वान किया।
कार्यशाला में सचिव, स्कूल शिक्षा विभाग डॉ. संजय गोयल, स्कूल शिक्षा और साक्षरता विभाग भारत सरकार के उप महानिदेशक डॉ. पंकज के. पी. श्रेयस्कर, संचालक राज्य शिक्षा केंद्र हरजिन्दर सिंह, अपर मिशन संचालक सुश्री काजल जावला, समग्र शिक्षा की अपर परियोजना संचालक सुश्री नंदा भलावे कुशरे, सीनियर डायरेक्टर NIC दिल्ली सबा अख़्तर एवं यूनिसेफ भारत के शिक्षा विशेषज्ञ गणेश निगम, अपर संचालक, राज्य शिक्षा केंद्र डॉ. अरुण सिंह सहित विभागीय अधिकारी, यूनिसेफ एवं एनआईसी के विशेषज्ञ उपस्थित रहे। राज्य शिक्षा केंद्र के यूडाइस प्रभारी सुमनकांत जैन और प्रशासक डॉ. राकेश दुबे ने कार्यशाला का समग्र समन्वय किया।
प्रदेश में 1.20 लाख स्कूलों का डेटा
स्कूल शिक्षा और साक्षरता विभाग भारत सरकार के उप महानिदेशक डॉ. पंकज के. पी. श्रेयस्कर ने UDISE + एवं PGI से संबंधित महत्वपूर्ण बिंदुओं पर विस्तृत प्रस्तुतीकरण करते हुए जानकारी साझा की। उन्होंने डेटा की गुणवत्ता, समयबद्ध प्रविष्टियों और शिक्षा क्षेत्र में आंकड़ों के व्यवस्थित उपयोग के महत्व पर चर्चा करते हुए बताया कि, यूडाइज प्लस 2025-26 के अनुसार मध्यप्रदेश में लगभग 1.20 लाख विद्यालय, 1.53 करोड़ विद्यार्थी और 7.29 लाख शिक्षकों से संबंधित आंकड़े दर्ज हैं। डॉ. श्रेयस्कर ने कहा कि इतने व्यापक स्तर पर संकलित डेटा में छोटी-सी विसंगति भी योजना निर्माण और संसाधन नियोजन को प्रभावित कर सकती है इसलिए डेटा को वास्तविक स्थिति के अनुरूप दर्ज करने और नियमित सत्यापन आवश्यक है।
पीजीआई से चिन्हित होंगे सुधार के क्षेत्र
कार्यशाला में यूनिसेफ नई दिल्ली के शिक्षा विशेषज्ञ गणेश निगम ने पीजीआई की संरचना उद्देश्य एवं उपयोग विषय पर प्रतिभागियों को जानकारी दी। उन्होंने पीजीआई इंडेक्स के विभिन्न संकेतकों को समझने तथा उनके आधार पर जिलों और विद्यालयों की प्राथमिकताओं को चिह्नित करने की आवश्यकता पर प्रकाश डाला। उनके द्वारा यूडाइज प्लस डेटा कैप्चर फॉर्मेट 2026-27 के प्रावधानों के साथ विद्यालय, भवन, सुविधाओं, डिजिटल संसाधनों, शिक्षकों एवं अन्य मानव संसाधनों से जुड़े डेटा की जानकारी दी गई। डॉ. गणेश निगम ने पीजीआई की संरचना और ग्रेडिंग प्रणाली पर उपयोगी प्रस्तुतीकरण दिया। उन्होंने मध्यप्रदेश के विभिन्न जिलों के पीजीआई रिपोर्ट कार्ड के माध्यम से वर्ष 2022-23 से 2025-26 तक के प्रदर्शन का विश्लेषण कर आंकड़ों के आधार पर सुधार के क्षेत्र चिन्हित करने की प्रक्रिया समझाई गई।
शिक्षा मंत्रालय भातर सरकार के सांख्यिकी अधिकारी संतन सिंह ने पीजीआई के विभिन्न डोमेन और संकेतकों की जानकारी दी, जबकि जगदीश कुमार ने पीजीआई-डी 2025-26 के तहत 70 संकेतकों और 600 अंकों के आधार पर जिलेवार प्रदर्शन के आकलन की प्रक्रिया बताई। इस दौरान सीखने के परिणाम, प्रभावी कक्षा शिक्षण. अधोसंरचना एवं सुविधाएं, विद्यार्थी हितलाभ, विद्यालय सुरक्षा एवं बाल संरक्षण, डिजिटल लर्निंग एवं प्रशासनिक प्रक्रियाओं जैसे विषयों पर चर्चा हुई।
यूडाइज प्लस मॉड्यूल का व्यावहारिक प्रशिक्षण
तीन दिवसीय कार्यशाला में NIC दिल्ली के सीनियर डायरेक्टर विकास जैन एवं सर्वेन्द्र तरुण द्वारा UDISE + पोर्टल का लाइव डेमो करके उसके प्रावधान दर्शाये गए। इस दौरान उन्होंने जिलों/ब्लॉक स्तरीय अधकिारियों की समस्याओं का तत्काल समाधान भी किया। उन्होंने विद्यालय निर्देशिका, प्रोफाइल एवं सुविधा, शिक्षक प्रबंधन और विद्यार्थी मॉड्यूल में डेटा प्रविष्टि, अद्यतन, सत्यापन और प्रबंधन की प्रक्रिया भी समझाई। जीपीएस मैपिंग, विद्यालयों के विलय एवं बंद होने की प्रक्रिया, शिक्षक एवं विद्यार्थियों की जानकारी तथा दैनिक डेटा सिंक्रोनाइजेशन का भी प्रदर्शन किया गया।
योजनाओं के क्रियान्वयन हेतु विश्वसनीय डेटा तथा सटीक विश्लेषण की महत्वपूर्ण भूमिका
संचालक राज्य शिक्षा केन्द्र हरजिंदर सिंह ने कार्यशाला में हुए समग्र विचार विमर्श पर अपने सार उद्बोधन में UDISE + एवं PGI इंडेक्स से प्राप्त जानकारी का उपयोग विद्यालयी शिक्षा में सुधार के लिए प्रभावी ढंग से करने की बात कही। उन्होंने कहा कि शैक्षणिक योजनाओं के बेहतर क्रियान्वयन और परिणामों के आकलन के लिए विश्वसनीय डेटा तथा उसके विश्लेषण की महत्वपूर्ण भूमिका है।
कार्यशाला में मुख्य रूप से इस बात पर जोर दिया गया कि सही और प्रमाणित डेटा बेहतर योजना, संसाधनों के प्रभावी नियोजन और लक्षित शैक्षिक सुधार का आधार है। पीजीआई एवं पीजीआई-डी रिपोर्ट का उपयोग केवल प्रदर्शन के आकलन के लिए नहीं, बल्कि सुधार के क्षेत्रों की पहचान कर साक्ष्य-आधारित कार्ययोजना तैयार करने के लिए किए जाने पर भी बल दिया गया।
कार्यशाला में मध्यप्रदेश के समस्त जिला शिक्षा अधिकारी, जिला परियोजना समन्वयक, अपर परियोजना समन्वयक, अतिरिक्त जिला परियोजना समन्वयक, जिला प्रोग्रामर तथा विकासखण्ड एमआईएस समन्वयक सहित राज्य शिक्षा केंद्र के अधिकारी सहभागी रहे।



