भोपाल: लोक संस्कृति को बढ़ावा देने वाले आयोजन जरूरी – भगवानदास सबनानी

भोपाल, सं. प्रशांत झिलपे – विंध्य एकता परिषद्, मध्यप्रदेश, भोपाल के तत्वावधान में सावन की सुहानी ऋतु, लोक संस्कृति और पारंपरिक विरासत को समर्पित सावन महोत्सव-2026 का भव्य आयोजन शनिवार को दुष्यन्त कुमार पांडुलिपि संग्रहालय सभागार, शिवाजी नगर में किया गया। कार्यक्रम में बघेली-बुंदेली लोकगीतों, कजरी, हिंडुली एवं झूलागीतों के सामूहिक गायन तथा मनमोहक समूह नृत्यों की प्रस्तुतियों ने उपस्थित लोगों को मंत्रमुग्ध कर दिया।
महिला समूहों ने पारंपरिक लोकगीतों और लोकनृत्यों की आकर्षक प्रस्तुतियां देकर सावन की लोक परंपराओं को जीवंत कर दिया। लोकगीतों की मधुर गूंज और पारंपरिक नृत्यों से पूरा सभागार सांस्कृतिक रंग में सराबोर नजर आया।
विधायक भगवानदास सबनानी ने अपने उद्बोधन में कहा कि सावन महोत्सव जैसे आयोजन हमारी लोक परंपराओं और सांस्कृतिक विरासत को जीवंत बनाए रखने का महत्वपूर्ण कार्य करते हैं। बघेली-बुंदेली लोकगीत और लोकनृत्य हमारी मिट्टी की पहचान हैं, जिन्हें नई पीढ़ी तक पहुंचाना हम सभी का दायित्व है।
उन्होंने विंध्य एकता परिषद् को आयोजन के लिए शुभकामनाएं देते हुए कहा कि सामाजिक एकता और सांस्कृतिक विरासत को मजबूत करने वाले ऐसे कार्यक्रम निरंतर आयोजित होते रहने चाहिए।
विंध्य एकता परिषद् की प्रदेश अध्यक्ष वंदना द्विवेदी ने अध्यक्षीय उद्बोधन में कहा कि बघेली और बुंदेली हमारी समृद्ध लोक सांस्कृतिक विरासत के महत्वपूर्ण अंग हैं। आधुनिक दौर में नई पीढ़ी को अपनी जड़ों, परंपराओं और संस्कारों से जोड़ना आवश्यक है। सावन महोत्सव जैसे आयोजन लोकगीत, लोकनृत्य और पारंपरिक संस्कारों को अगली पीढ़ी तक पहुंचाने का प्रभावी माध्यम हैं।
उन्होंने कहा कि लोक संस्कृति केवल मनोरंजन का साधन नहीं, बल्कि हमारी पहचान, इतिहास और सामाजिक परंपराओं की जीवंत धरोहर है। इसे संरक्षित करना और आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचाना हम सभी की जिम्मेदारी है। उन्होंने आयोजन में सहभागिता करने वाले सभी समाजजनों एवं महिलाओं का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि सामूहिक सहभागिता से ही ऐसे सांस्कृतिक आयोजनों को नई ऊंचाइयां मिलती हैं।
कार्यक्रम में भोपाल में निवासरत बिंद समाज के परिवारों सहित बड़ी संख्या में नागरिकों ने सहभागिता की। आयोजकों की ओर से सात लाख से अधिक बिंद परिवारों सहित सभी नागरिकों को कार्यक्रम में आमंत्रित किया गया था। आयोजन के दौरान लोक संस्कृति, सामाजिक एकता और पारंपरिक विरासत के संरक्षण का संदेश दिया गया।



