भोपाल: मध्यप्रदेश में मजबूत होगी खिलाड़ियों की ग्रासरूट से पोडियम तक की राह – मंत्री विश्वास कैलाश सारंग

भोपाल, सं. प्रशांत झिलपे – स्पोर्ट्स अथॉरिटी ऑफ इंडिया (साई) क्षेत्रीय केंद्र, भोपाल और खेल एवं युवा कल्याण विभाग, मध्यप्रदेश द्वारा नई खेलो इंडिया स्कीम (2026-31) को लेकर प्रेस इंटरेक्शन का आयोजन किया जा रहा है।
36,441 करोड़ की नई खेलो इंडिया योजना, आजादी के बाद खेलों में सबसे बड़ा निवेशः मध्यप्रदेश में मजबूत होगी खिलाड़ियों की ग्रासरूट से पोडियम तक की राह, 10 गुना ज्यादा खिलाड़ियों को मदद; जिलों में टैलेंट की पहचान, इंफ्रास्ट्रक्चर, कोचिंग, स्पोर्ट्स साइंस और टेक्नोलॉजी पर फोकस.
भारतीय खेल प्राधिकरण (SAI), केंद्रीय क्षेत्रीय केंद्र, भोपाल की ओर से खेलो इंडिया स्कीम 2026–31 के संबंध में खेल एवं युवा कल्याण मंत्री, मध्यप्रदेश विश्वास कैलाश सारंग ने TT नगर स्टेडियम मे आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस के माध्यम से नई खेलो इंडिया स्कीम और मध्य प्रदेश के खेल परिदृश्य में इसकी संभावनाओं के प्रमुख बिंदुओं पर प्रकाश डाला.
प्रेस कॉन्फ्रेंस में माननीय खेल एवं युवा कल्याण मंत्री, मध्यप्रदेश विश्वास कैलाश सारंग, माननीय डायरेक्टर DSYW अंशुमन यादव, क्षेत्रीय निदेशक भारतीय खेल प्राधिकरण भोपाल अभिषेक सिंह चौहान मुख्य रूप से उपस्थिति थे।
नई खेलो इंडिया स्कीम और मध्य प्रदेश के खेल परिदृश्य में इसकी संभावनाओं पर प्रमुख बिंदु…
नई योजना का उद्देश्य केवल ज्यादा खिलाड़ियों को जोड़ना नहीं, बल्कि प्रतिभा की शुरुआती पहचान से लेकर हाई परफॉर्मेंस ट्रेनिंग और अंतरराष्ट्रीय स्तर तक एक मजबूत और व्यवस्थित स्पोर्टिंग इकोसिस्टम तैयार करना है।
केंद्र सरकार ने नई खेलो इंडिया स्कीम के लिए 2026-31 तक 36,441 करोड़ रुपए का प्रावधान किया है। यह पिछली योजना के मुकाबले करीब 8 गुना अधिक है। यह आजादी के बाद खेलों में किया गया सबसे बड़ा निवेश है। इस स्कीम से 10 गुना ज्यादा खिलाड़ियों को लाभ मिलेगा।
MP के हर हिस्से तक खेल की पहुंच
मध्यप्रदेश में वर्तमान में 52 खेलो इंडिया सेंटर (KIC) संचालित हैं और लगभग हर जिले में एक केंद्र मौजूद है। नई योजना के तहत मौजूदा खेलो इंडिया सेंटर और साई ट्रेनिंग सेंटर को और मजबूत किया जाएगा।
प्रदेश में अलग-अलग क्षेत्रों की खेल प्रतिभा और वहां की संभावनाओं के आधार पर नए केंद्रों और सुविधाओं का विस्तार किया जाएगा। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि किसी खिलाड़ी की भौगोलिक स्थिति उसके खेल विकास में बाधा न बने।
जिलों और स्थानीय स्तर पर प्रतिभाओं की पहचान कर उन्हें चरणबद्ध तरीके से बेहतर कोचिंग, ट्रेनिंग और प्रतिस्पर्धा के अवसरों से जोड़ा जाएगा।
भोपाल- हाई-परफॉर्मेंस स्पोर्ट्स हब
भोपाल में मौजूद खेल सुविधाएं और विभिन्न खेलों के राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ी इसे प्रदेश के प्रमुख हाई परफॉर्मेंस स्पोर्ट्स हब के रूप में विकसित कर रहे हैं।
नई खेलो इंडिया स्कीम का फोकस जिला स्तर पर मिलने वाली प्रतिभा और हाई-परफॉर्मेंस ट्रेनिंग के बीच मजबूत कड़ी बनाने पर रहेगा। बेहतर प्रदर्शन करने वाले खिलाड़ियों को आगे की ट्रेनिंग, स्पोर्ट्स साइंस और विशेषज्ञ सहयोग से जोड़ने की दिशा में काम किया जाएगा। इससे प्रदेश के अलग-अलग हिस्सों से निकलने वाली प्रतिभाओं के लिए आगे बढ़ने का एक स्पष्ट रास्ता तैयार हो सकेगा।
अब खेलों की ताकत के हिसाब से बनेगी रणनीति
मध्य प्रदेश के अलग-अलग क्षेत्रों में अलग-अलग खेलों की मजबूत परंपरा और प्रतिभा मौजूद है। नई योजना के तहत ऐसे टैलेंट क्लस्टर की पहचान कर खेल विकास की रणनीति तैयार करने पर जोर दिया जाएगा। इसके लिए यह देखा जाएगा कि किन क्षेत्रों में किसी खेल की मजबूत प्रतिभा उपलब्ध है, कहां बेहतर इंफ्रास्ट्रक्चर मौजूद है और किन स्थानों पर कोचिंग, सुविधाओं या प्रतियोगिताओं की जरुरत है।
इससे एक जैसी व्यवस्था लागू करने के बजाय स्थानीय खेल क्षमता के अनुसार संसाधनों और सुविधाओं की योजना बनाई जा सकेगी।
इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए 3 स्तर पर काम
नई खेलो इंडिया योजना में खेल इंफ्रास्ट्रक्चर को तीन प्रमुख हिस्सों में बांटा गया है-
1. स्पोर्ट्स इंफ्रास्ट्रक्चर फॉर मेडल स्ट्रेटजी...
ओलिंपिक और अन्य प्रमुख अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में बेहतर प्रदर्शन के लक्ष्य से जरुरी खेल सुविधाओं का विकास।
2. स्ट्रेंथनिंग स्ट्रेटेजिक स्पोर्ट्स एसेट्स...
महत्वपूर्ण मौजूदा खेल परिसरों और सुविधाओं को आधुनिक और मजबूत बनाना।
3. स्टेट एक्शन प्लान फॉर स्पोर्ट्स इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट…
राज्यों को उनकी जरूरत और खेल प्राथमिकताओं के अनुसार इंफ्रास्ट्रक्चर प्लानिंग में बड़ी भूमिका देना।
मध्यप्रदेश में ओलिंपिक, एशियन गेम्स और कॉमनवेल्थ गेम्स से जुड़े खेलों के मौजूदा इंफ्रास्ट्रक्चर की मैपिंग की जा सकेगी। इसके बाद गैप एनालिसिस के आधार पर अपग्रेडेशन और नई सुविधाओं की जरूरत तय की जाएगी।
इंफ्रास्ट्रक्चर में केंद्र-राज्य की 60:40 साझेदारी
स्टेट एक्शन प्लान के तहत खेल इंफ्रास्ट्रक्चर के विकास में केंद्र और राज्य 60:40 के कॉस्ट-शेयरिंग मॉडल पर काम करेंगे। हालांकि, फोकस केवल नई बिल्डिंग या स्टेडियम बनाने पर नहीं रहेगा। फंडिंग को खिलाड़ियों के विकास, उन्हें खेल से जोड़े रखने, ग्रासरूट से एलीट लेवल तक पहुंचाने और सुधार आधारित लक्ष्यों से भी जोड़ा जाएगा।
स्कूल से ही होगी वैज्ञानिक तरीके से टैलेंट की पहचान
नई योजना की सबसे अहम विशेषताओं में साइंटिफिक और टेक्नोलॉजी आधारित टैलेंट आइडेंटिफिकेशन सिस्टम शामिल है। इसके तहत खेलो इंडिया उत्कृष्ट विद्यालय, खेलो इंडिया फीडर स्कूल और खेलो इंडिया सेंटर का नेटवर्क प्रतिभाओं की पहचान और उनके विकास में अहम भूमिका निभाएगा। उद्देश्य यह है कि खेल प्रतिभा की पहचान शुरुआती स्तर पर हो और उसे व्यवस्थित तरीके से आगे बढ़ने का अवसर मिले। मध्यप्रदेश के लिए यह व्यवस्था स्कूल और जिला स्तर से प्रतिभाशाली खिलाड़ियों को खेल की मुख्यधारा से जोड़ने में मददगार हो सकती है।
उभरते खिलाड़ियों को मिलेगा अगला प्लेटफॉर्म
नई योजना में खिलाड़ियों के लिए खेलो इंडिया एथलीट (KIA) के साथ इमर्जिंग खेलो इंडिया एथलीट (E-KIA) का प्रावधान भी किया गया है। E-KIA के जरिए शुरुआती स्तर पर पहचानी गई प्रतिभाओं और उच्च स्तरीय प्रतिस्पर्धा के बीच की दूरी कम करने का प्रयास किया जाएगा।
इससे ऐसे खिलाड़ियों को आगे बढ़ने का अवसर मिल सकेगा, जो प्रतिभाशाली तो हैं, लेकिन अभी एलीट स्तर की श्रेणी तक नहीं पहुंचे हैं।
ट्रेनिंग ही नहीं, डाइट से लेकर एजुकेशन तक सपोर्ट
योजना के तहत खिलाड़ियों को केवल कोचिंग और ट्रेनिंग तक सीमित सहायता नहीं मिलेगी।
सहयोग के दायरे में कोचिंग, डाइट और आवास, स्पोर्ट्स किट, यात्रा, प्रतियोगिताओं में भागीदारी, मेडिकल केयर और शिक्षा जैसे पहलू शामिल होंगे। स्पोर्ट्स साइंस से जुड़े विशेषज्ञ भी खिलाड़ी के विकास में अहम भूमिका निभाएंगे, जिससे उसकी ट्रेनिंग और प्रदर्शन को वैज्ञानिक आधार मिल सके।
ज्यादा मुकाबले, ज्यादा अनुभव
खिलाड़ियों को स्कूल, यूनिवर्सिटी, रीजनल, जोनल और खेल विशेष प्रतियोगिताओं व लीग के जरिए ज्यादा प्रतिस्पर्धी अवसर उपलब्ध कराने पर जोर रहेगा। खेलो इंडिया यूथ गेम्स और खेलो इंडिया यूनिवर्सिटी गेम्स के अलावा योजना में खेलो इंडिया पैरा गेम्स, विंटर गेम्स, बीच गेम्स, ट्राइबल गेम्स, वाटर स्पोर्ट्स और अस्मिता वुमन लीग भी शामिल हैं। नियमित प्रतियोगिताओं से खिलाड़ियों को अपने प्रदर्शन का आकलन करने, बेहतर प्रतिस्पर्धियों के खिलाफ खेलने और बड़े मंच के लिए तैयार होने का अवसर मिलेगा।
कोच और स्पोर्ट्स साइंस पर भी बड़ा फोकस
नई योजना में खिलाड़ियों के साथ-साथ उनके सपोर्ट सिस्टम को मजबूत करने पर भी जोर दिया गया है। कोच और सपोर्ट स्टाफ की स्किलिंग, क्षमता विकास और अंतरराष्ट्रीय एक्सपोजर के माध्यम से उनकी गुणवत्ता बढ़ाई जाएगी। साथ ही प्रस्तावित नेशनल कोच एक्रेडिटेशन बोर्ड (NCAB) के जरिए कोचिंग के पेशेवर मानकों को मजबूत करने का लक्ष्य है।
खिलाड़ियों को कोच के अलावा डॉक्टर, फिजियोथेरेपिस्ट, साइकोलॉजिस्ट, न्यूट्रिशनिस्ट और बायोमैकेनिस्ट जैसे विशेषज्ञों का सहयोग भी उपलब्ध कराया जाएगा।
फिट इंडिया से बढ़ेगा खेलों का मजबूत बेस
नई खेलो इंडिया योजना के तहत फिट इंडिया मूवमेंट को और व्यापक बनाया जाएगा। इसमें कम्युनिटी फिटनेस हब, जनभागीदारी कार्यक्रम, योग और स्वदेशी खेलों को बढ़ावा दिया जाएगा।
महिलाओं और दिव्यांगजनों की भागीदारी बढ़ाने के साथ शैक्षणिक संस्थानों और सामुदायिक संगठनों के साथ साझेदारी पर भी जोर रहेगा। इससे फिटनेस की संस्कृति को बढ़ावा मिलेगा और खेलों के लिए एक मजबूत ग्रासरूट बेस तैयार करने में मदद मिलेगी।
टेक्नोलॉजी से ट्रैक होगी खिलाड़ी की पूरी जर्नी
स्पोर्ट्स टेक्नोलॉजी को नई खेलो इंडिया योजना में एक अलग और महत्वपूर्ण घटक के रूप में शामिल किया गया है। इसमें AI और वीडियो आधारित टैलेंट स्काउटिंग, 10T आधारित वेयरेबल्स, स्पोर्ट्स साइंस, AI आधारित परफॉर्मेंस एनालिटिक्स और डिजिटल कॉम्पिटिशन मैनेजमेंट जैसी तकनीकों का उपयोग किया जाएगा।
इसका उद्देश्य खिलाड़ी की खेल यात्रा को अधिक व्यवस्थित और डेटा आधारित बनाना है, ताकि शुरुआती पहचान से लेकर उसके प्रदर्शन और विकास को बेहतर तरीके से ट्रैक किया जा सके।
MP के लिए क्या बदलेगा?
नई खेलो इंडिया योजना के माध्यम से मध्यप्रदेश के सामने अवसर है कि वह अपने मौजूदा खेल ढांचे को और मजबूत करे और जिला स्तर की प्रतिभाओं को हाई-परफॉर्मेंस सिस्टम से जोड़े।
52 खेलो इंडिया सेंटरों के मौजूदा नेटवर्क, नए टैलेंट क्लस्टर की पहचान, इंफ्रास्ट्रक्चर की जरूरत आधारित प्लानिंग, वैज्ञानिक टैलेंट आइडेंटिफिकेशन और ज्यादा प्रतियोगिताओं के जरिए प्रदेश में एक मजबूत स्पोर्टिंग पाइपलाइन विकसित करेगी।
विकसित भारत के लिए एक राष्ट्रीय मिश
नई खेलो इंडिया योजना भारत के खेल भविष्य में अब तक किए गए सबसे बड़े निवेशों में से एक है। यह केवल खेलों को बढ़ावा देने वाली योजना नहीं, बल्कि युवाओं को अवसर, आत्मविश्वास और उत्कृष्टता के साथ सशक्त बनाने का एक राष्ट्रीय मिशन है।
ग्रासरूट स्तर पर प्रतिभाओं की पहचान से लेकर उन्हें अंतरराष्ट्रीय मंच तक पहुंचाने के लिए एक मजबूत और निर्बाध खेल मार्ग तैयार करने के माध्यम से, इस योजना का लक्ष्य नए चैंपियंस तैयार करना, देश में फिटनेस की संस्कृति को बढ़ावा देना और भारत के खेल इकोसिस्टम को और मजबूत करना है।
विकसित भारत @2047 के विजन के अनुरुप, नई खेलो इंडिया योजना भारत को दुनिया की अग्रणी खेल महाशक्तियों में शामिल करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।



