भोपाल: मध्यप्रदेश में फर्जी जनजाति प्रमाण पत्र पर नौकरी पाने का बड़ा मामला आया सामने…

भोपाल, सं. प्रशांत झिलपे – मध्यप्रदेश में फर्जी जनजाति प्रमाण पत्र पर नौकरी पाने का बड़ा मामला सामने आया है। शासन की उच्च स्तरीय जाति छानबीन समिति ने बीते आठ सितंबर को पीटीएस उमरिया में पदस्थ उप निरीक्षक अमिताभ प्रताप सिंह का एस.टी. (गोंड जनजाति) का प्रमाण पत्र अमान्य घोषित कर दिया है। जानकारी अनुसार अनावेदक ने वर्ष 1997-98 में अनुविभागीय अधिकारी राजस्व जबलपुर के कार्यालय से प्रमाण पत्र क्र.-6745-बी/121/97-98 तैयार कराया था। इसी के आधार पर वर्ष 2000 में मध्यप्रदेश पुलिस में उप निरीक्षक के पद पर चयनित हो गया। समिति द्वारा प्रकरण क्र. 2169/2019 में जांच के दौरान पुलिस अधीक्षक जबलपुर एवं कलेक्टर जबलपुर से तथ्यात्मक जानकारी ली गई। जांच में राजस्व कार्यालय के डायरी पंजी में उक्त प्रमाण पत्र की कोई प्रविष्टि नहीं मिली। समिति ने इसे काल्पनिक एवं फर्जी पाया। इस संबंध में पहली शिकायत वर्ष 2019 में श्रीमती सोनाली दातरे सिंह (भोपाल) और दूसरी शिकायत 2024 में श्रीमती प्रमिला तिवारी (भोपाल) द्वारा की गई थी।
– नौकरी में रहते हुए फिर बनवाया डिजिटल फर्जी प्रमाण पत्र
जांच के दौरान ही अनावेदक ने 2024 में जिला पुलिस बल बुरहानपुर में पदस्थ रहते हुए एसडीएम गोरखपुर, जबलपुर से डिजिटल जाति प्रमाण पत्र के लिए आवेदन किया। जिसमें व्यवसाय मजदूरी, निवास पातोंदा पुलिस लाइन बुरहानपुर और पता 206, अंकुर अपार्टमेंट सिविल लाइन जबलपुर लेख कर नया प्रमाण पत्र जारी करा लिया। शिकायत होने पर एसडीएम द्वारा इसे निरस्त कर दिया गया।
छानबीन समिति के निर्देश पर एसडीएम रांझी एवं डीएसपी, डीएसबी जबलपुर की जांच में प्रस्तुत दस्तावेज असत्य पाए गए। अनावेदक वर्ष 1950 के निवास का कोई प्रमाण और गोंड जनजाति से संबंधित कोई सांस्कृतिक, धार्मिक जानकारी भी प्रस्तुत नहीं कर सका।समिति ने राजस्व एवं पुलिस प्रशासन की अनुशंसा से सहमत होकर प्रमाण पत्र अमान्य घोषित किया है।
– FIR और वेतन रिकवरी की मांग
आवेदिका द्वारा न्यायहित, समाजहित एवं पुलिस प्रशासन हित में वरिष्ठ अधिकारियों को निर्णय की प्रति भेजकर अनावेदक के विरुद्ध धारा 420, 467, 468, 471 भादवि के तहत प्रकरण दर्ज करने, अविलंब सेवा से बर्खास्त करने तथा नियुक्ति दिनांक से बर्खास्तगी दिनांक तक दिए गए वेतन एवं शासकीय भुगतानों की रिकवरी की मांग की गई है।
वर्तमान में फिंगर प्रिंट मिलान की कार्रवाई की जांच एसडीओपी सिहोरा जिला जबलपुर द्वारा की जा रही है।
इनका कहना है
मेरे खिलाफ फर्जी जाति प्रमाण पत्र की शिकायत पर मुझे अपना पक्ष रखने का मौका नहीं दिया गया है। मैं उच्च न्यायालय से इस संबंध में स्टे लेने की कार्यवाही करूंगा।
– अमिताभ प्रताप सिंह
उप निरीक्षक, पीटीएस उमरिया



