मध्य प्रदेश

भोपाल: परंपरा की उपेक्षा या प्रशासनिक असंवेदनशीलता…? शांति समिति की बैठक से दूर रखी गई श्री हिंदू उत्सव समिति, अध्यक्ष तिवारी ने जताया विरोध…

भोपाल, रंगों और उमंग के पावन पर्व होली एवं रंग पंचमी के चल समारोह को लेकर शहर में तैयारियाँ प्रारंभ हो चुकी हैं, किंतु इसी बीच प्रशासनिक कार्यशैली पर गंभीर प्रश्नचिह्न खड़े हो गए हैं। पुलिस कमिश्नर कार्यालय में आयोजित शांति समिति की बैठक में राजधानी की सबसे पुरानी और परंपरागत आयोजक संस्था श्री हिंदू उत्सव समिति के अध्यक्ष एवं किसी भी पदाधिकारी को आमंत्रित न किया जाना न केवल आश्चर्यजनक, बल्कि प्रशासनिक असंवेदनशीलता का परिचायक माना जा रहा है।

उल्लेखनीय है कि वर्षों से होली और रंग पंचमी का भव्य चल समारोह इसी समिति के नेतृत्व में निकलता आया है। शहर की सांस्कृतिक धारा में इस समिति की भूमिका केवल आयोजक की नहीं, बल्कि परंपरा के संरक्षक की रही है। ऐसे में शांति समिति जैसी महत्वपूर्ण बैठक, जिसमें कानून-व्यवस्था, मार्ग, सुरक्षा और समन्वय जैसे विषयों पर चर्चा होती है, उसमें प्रमुख आयोजक संस्था को ही दरकिनार कर देना प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े करता है।

समिति के अध्यक्ष चंद्रशेखर तिवारी ने कड़ा विरोध जताते हुए कहा कि जब होली और रंग पंचमी का जुलूस श्री हिंदू उत्सव समिति के नेतृत्व में निकलता है, तो बगैर समिति को विश्वास में लिए बैठक करने का क्या औचित्य है? क्या यह संवाद की परंपरा को तोड़ने का प्रयास नहीं है?”

उनका यह वक्तव्य केवल व्यक्तिगत आक्रोश नहीं, बल्कि उन हजारों श्रद्धालुओं और स्वयंसेवकों की भावना का प्रतिनिधित्व करता है, जो वर्षों से इस सांस्कृतिक आयोजन को सफल बनाते आए हैं। प्रशासन यदि शांति और समन्वय की बात करता है, तो उसे सबसे पहले संवाद और सहभागिता की भावना को प्राथमिकता देनी चाहिए।

शहर के सांस्कृतिक हलकों में भी यह चर्चा जोर पकड़ रही है कि क्या प्रशासन परंपरागत आयोजकों को हाशिये पर रखकर औपचारिकता निभा रहा है? शांति समिति की बैठक का उद्देश्य समाज के सभी प्रमुख घटकों को साथ लेकर सामंजस्य स्थापित करना होता है, न कि उन्हें उपेक्षित कर एकतरफा निर्णय लेना।

अब प्रश्न यह है कि क्या प्रशासन इस चूक को स्वीकार कर भविष्य में संवाद की राह अपनाएगा, या फिर परंपरा और सहभागिता के स्थान पर एकपक्षीय निर्णयों का सिलसिला जारी रहेगा? राजधानी की जनता की निगाहें अब प्रशासनिक संवेदनशीलता और उत्तरदायित्व पर टिकी हैं।

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