भोपाल: इंदौर दूषित पानी से 14 लोगों की मौत, घटना लोकतंत्र, मीडिया और जनता तीनों का अपमान है – समाजवादी पार्टी

भोपाल सं. प्रशांत झिलपे – इंदौर के भागीरथपुरा क्षेत्र में पिछले दो वर्षों से गंदे और दूषित पानी की आपूर्ति के कारण हुई मौतें एवं गंभीर बीमारियां सीधे तौर पर प्रशासनिक लापरवाही और असंवेदनशील जनप्रतिनिधियों की देन हैं। बार-बार शिकायतों के बावजूद नगर निगम, प्रशासन और जिम्मेदार जनप्रतिनिधियों ने समय रहते कोई ठोस कार्रवाई नहीं की, जिसका खामियाजा गरीब और आम जनता को अपनी जान देकर भुगतना पड़ा, भागीरथपुरा में सप्लाई हो रहे नर्मदा जल की जांच रिपोर्ट ने सरकार के “स्वच्छ पानी” के दावों की पोल खोल दी है। रिपोर्ट में पानी को पीने योग्य नहीं पाया गया है। सैंपल में फीकल कॉलिफॉर्म, ई-कोलाई, विब्रियो और प्रोटोजोआ जैसे घातक बैक्टीरिया पाए गए हैं। सूत्रों के अनुसार हैजा फैलाने वाला विब्रियो कोलेरी भी पानी में मौजूद है। यह स्थिति सीधे तौर पर जनस्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ है, इस मामले में अब तक 14 लोगों की मौत हो चुकी है। सवाल सीधा है—इन मौतों का जिम्मेदार कौन है? लोगों ने सरकार से साफ पानी मांगा था, लेकिन बदले में उन्हें मौत दे दी गई। लगातार शिकायतों के बावजूद प्रशासन और जनप्रतिनिधियों ने आंखें मूंदे रखीं। यह सिर्फ लापरवाही नहीं, बल्कि जनता की जान के साथ खुला अपराध है। सरकार बताए—क्या जिम्मेदारी तय होगी या फिर यह मौतें भी फाइलों में दफन कर दी जाएंगी?
समाजवादी पार्टी, मध्यप्रदेश यह भी कड़ी निंदा करती है कि मंत्री कैलाश विजयवर्गीय द्वारा मृतकों के परिजनों को मात्र दो-दो लाख रुपये का चेक देकर मामले को रफा-दफा करने का प्रयास किया गया। पीड़ित परिवारों ने इन चेकों को ठुकराकर सरकार की संवेदनहीनता को आईना दिखाया। इससे भी अधिक शर्मनाक यह है कि जब पत्रकारों ने पानी, रिफंड और मौतों को लेकर सवाल पूछे तो मंत्री द्वारा पत्रकारों से अभद्रता की गई और मृतकों के सवाल पर हंसी उड़ाई गई। यह लोकतंत्र, मीडिया और जनता—तीनों का अपमान है, भाजपा के स्थानीय पार्षदों और जनप्रतिनिधियों का व्यवहार भी अत्यंत निंदनीय है, जहां फरियादी ज़मीन पर बैठकर अपनी पीड़ा बताते हैं और जनप्रतिनिधि सोफों पर आराम फरमाते नजर आते हैं। यह सत्ता का घमंड और जनता के प्रति तिरस्कार को दर्शाता है, इंदौर में दूषित पानी से 14 लोगों की मौत के बाद भी मध्य प्रदेश ने कोई सबक नहीं लिया। अब राजधानी भोपाल से भी वैसी ही चौंकाने वाली तस्वीर सामने आई है। एक प्रतिष्ठित न्यूज़ चैनल की पड़ताल में खुलासा हुआ है कि भोपाल के सिंगापुर विलास कैंपस में ट्यूबवेल और सीवेज लाइन साथ-साथ हैं, जिससे लोगों का स्वास्थ्य बिगड़ने लगा। जेके हॉस्पिटल के पास स्थित इस हाई-प्रोफाइल सोसायटी में उद्योगपति और वरिष्ठ अधिकारी रहते हैं, फिर भी बिल्डर और सोसायटी की घोर लापरवाही उजागर हुई है। इंदौर के बाद अब भोपाल—यह साफ दिखाता है कि समस्या किसी एक शहर की नहीं, बल्कि पूरे मध्य प्रदेश में जिम्मेदारों की लापरवाही की है। सवाल वही है—क्या अगली मौत के बाद ही सरकार जागेगी?
समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने इंदौर की घटना पर बड़ा सवाल खड़ा किया है, उन्होंने कहा कि जिस इंदौर को स्वच्छता के लिए अवार्ड मिले, वहां पीने के पानी से लोगों की जान चली जाए—तो सरकार के दावों की सच्चाई क्या है? कई लोग गंभीर रूप से बीमार पड़े और सवाल पूछने पर भाजपा नेताओं ने पत्रकारों से भी अभद्रता की। यही वे लोग हैं जिन्होंने गंगा नदी को साफ करने का वादा किया था, लेकिन हकीकत यह है कि उसका पानी पीने से लोग बीमार हो रहे हैं। यमुना नदी में नहाने से शरीर में खुजली और संक्रमण फैल रहा है। सवाल यह है कि जब नदियां और शहर सुरक्षित नहीं, तो सरकार किस स्वच्छता मॉडल की बात कर रही है? क्या अवार्ड ही सब कुछ हैं या जनता की जान की कोई कीमत नहीं? मध्य प्रदेश सरकार को इन सवालों का जवाब देना होगा।
समाजवादी पार्टी, मध्य प्रदेश की मांग है कि :—
• इस पूरे मामले में दोषी अधिकारियों, ठेकेदारों और जिम्मेदार जनप्रतिनिधियों पर गैर इरादतन हत्या सहित कठोर धाराओं में तत्काल एफआईआर दर्ज की जाए।
• भागीरथपुरा सहित प्रभावित क्षेत्रों में शुद्ध पेयजल की आपूर्ति तत्काल सुनिश्चित की जाए और वैकल्पिक व्यवस्था की जाए।
• मृतकों के परिजनों को 50 लाख रुपए की मुआवजा राशि एवं परिवार के एक सदस्य को रोजगार दिया जाए।
• पूरे मामले की न्यायिक जांच कराई जाए और रिपोर्ट सार्वजनिक की जाए।
• पत्रकारों से अभद्रता और असंवेदनशील बयानबाजी पर संबंधित मंत्री से सार्वजनिक माफी ली जाए।
• समाजवादी पार्टी स्पष्ट करती है कि जनता की जान से खिलवाड़ किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। यदि सरकार ने शीघ्र कार्रवाई नहीं की तो पार्टी सड़कों पर उतरकर जनआंदोलन करेगी।



