भोपाल: अनुगूंज में दिखी कला से समृद्ध शिक्षा की झलक, बच्चों को शिक्षा देने के साथ उनके समग्र विकास के होंगे प्रयास – मुख्यमंत्री डॉ. यादव

शिक्षा में गुणात्मक सुधार के लिए हो रहे लगातार नवाचार
स्कूल शिक्षा विभाग की कला से समृद्ध शिक्षा है अनुगूंज
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने 200 सीटर बालक छात्रावास का किया लोकार्पण
भोपाल, सम्पादक प्रशांत झिलपे – मप्र स्कूल शिक्षा विभाग द्वारा कला से समृद्ध शिक्षा के तहत राजधानी के शिवाजी नगर में स्थित शासकीय सुभाष उत्कृष्ट विद्यालय में सांस्कृतिक कार्यक्रम अनुगूंज का आयोजन किया गया। अनुगूंज के इस पांचवें आयोजन में शासकीय विद्यालयों के लगभग 700 विद्यार्थियों ने अपनी कला का प्रदर्शन किया। दो दिवसीय यह कार्यक्रम वर्ड क्लासिक्स की केंद्रीय थीम से सजाया गया है। अनुगूंज का यह पांचवां आयोजन है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने अनुगूंज कार्यक्रम में संबोधन दिया।
मुख्यमंत्री डॉ. यादव मंगलवार ने शासकीय सुभाष उत्कृष्ट विद्यालय भोपाल में आयोजित अनुगूंज कार्यक्रम के संबोधन में कहा है कि प्रदेश में उभरती प्रतिभाओं को स्कूल शिक्षा विभाग ने अनुगूंज के माध्यम से सशक्त मंच दिया है, जो सराहनीय है। स्कूल शिक्षा विभाग बच्चों में शिक्षा के साथ उनके समग्र व्यक्तित्व विकास के लिए प्रतिबद्ध है। डॉ. यादव ने कहा कि सरकारी स्कूलों के विकास के लिए निरंतर नवाचार किए जाते रहेंगे। हमारे कई सरकारी स्कूलों ने राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर पुरस्कार प्राप्त कर मध्यप्रदेश को गौरवान्वित किया है। । मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने सुभाष शासकीय उत्कृष्ट विद्यालय में सुपर-100 योजना में अध्ययन करने वाले 200 सीटर बालक छात्रावास भवन का लोकार्पण भी किया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि शासकीय शिक्षकों का योगदान वास्तव में अद्भुत है। जिस कर्मठता और दिल से शिक्षक काम करते हैं। निश्चित ही वे बधाई के पात्र हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बताया कि दिल्ली में लाल किले के बाद सम्राट विक्रमादित्य नाट्य का मंचन अब भोपाल में 2 और 3 नवम्बर को होने वाला है। उन्होंने बड़ी संख्या में नागरिकों से इसमें शामिल होने का अनुरोध किया। कार्यक्रम में स्कूल शिक्षा मंत्री श्री उदय प्रताप सिंह, विधायक श्री भगवान दास सबनानी, भोपाल महापौर श्रीमती मालती राय, अध्यक्ष नगर निगम श्री किशन सूर्यवंशी, भोपाल जिला पंचायत के उपाध्यक्ष श्री जाट भी उपस्थित थे।
मुख्यमंत्री डॉ यादव ने कहा कि प्रदेश में शिक्षा के क्षेत्र में महत्वपूर्ण कार्य हो रहे हैं, अब सांदीपनि विद्यालयों में प्रवेश के लिए विद्यार्थी इच्छुक रहते हैं। यह बदलते दौर का मध्यप्रदेश है। प्रदेश में श्रेष्ठ परीक्षा परिणाम आ रहे हैं। प्रदेश में अब बच्चे प्राइवेट स्कूल से सरकारी स्कूलों की ओर आकर्षित हो रहे हैं। उन्होंने अनुगूंज कार्यक्रम के लिए मंच सज्जा और आकल्पन की प्रशंसा की। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने सम्राट विक्रमादित्य का उल्लेख करते हुए इन्हें राष्ट्र को स्वतंत्र करवाने से लेकर सुशासन, वीरता और दानशीलता के क्षेत्र में अद्भुत कार्य करने वाला शासक बताया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा हमारे बीच मानो आज भी सम्राट विक्रमादित्य शासन कर रहे हों। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने अनुगूंज में शामिल मेंटर्स को सम्मानित किया।
जनजाति कल्याण मंत्री कुंवर डॉ. विजय शाह ने कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति: 2020 विद्यार्थी के सर्वागींण विकास पर जोर देते हुए कला और संस्कृति के समावेश की दिशा को प्रशस्त करती है। इसका सर्वश्रेष्ठ उदाहरण अनुगूंज है।
सांस्कृतिक कार्यक्रम
अनुगूंज के सातवें संस्करण में स्कूल के विद्यार्थियों ने वाद्य संगीत, ओडिसी विधा में आम और चमेली का विवाह, भरतनाट्यम विधा में दशावतारम, कथक नृत्य वाटिका विधा में आमंत्रण सिंहस्थ का और मणिपुरी नृत्य विधा में श्रीकृष्ण वन्दना की प्रस्तुति दी। नाटक में बच्चों ने ताना बना टूट ना जाए की प्रस्तुति दी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने “आमंत्रण सिंहस्थ का” सहित सभी प्रस्तुतियों की प्रशंसा की। कार्यक्रम में आयुक्त लोक शिक्षण श्रीमती शिल्पा गुप्ता ने मुख्यमंत्री डॉ. यादव और अन्य अतिथियों का स्वागत किया। स्कूल शिक्षा सचिव डॉ. संजय गोयल ने आभार माना। कार्यक्रम का संचालन स्कूल के बच्चों ने किया। इसके साथ मंच संचालन में श्री विनय उपाध्याय ने बच्चों का सहयोग किया।
इसके अलावा अनुगूंज के मंच संचालन कर रहे विद्यार्थियों को आकाशवाणी के वरिष्ठ उद्घोषक अरविंद सोनी ने उद्घोषक कार्यशाला में मंच संचालन और उद्घोषणा की कला से संवारा है।
पहले दिन अनुगूंज के धनक में वाद्यवृन्द, गीत संगीत की जुगलबंदी, भारत के विविध शास्त्रीय नृत्य, फ्यूजन और वेस्टर्न नृत्य आदि की प्रस्तुतियां दी गईं। इस वर्ष इस राज्य स्तरीय कार्यक्रम में इंदौर संभाग की नृत्य प्रस्तुति भी शामिल हुईं। बता दें कि अनुगूंज स्कूल शिक्षा विभाग द्वारा वैश्विक शिक्षा प्रणाली की दिशा में कला से समृद्ध शिक्षा का अभिनव आयोजन है। इस दौरान विद्यार्थियों को अंतरराज्यीय संस्कृति, कलाओं और शैलियों को जानने का अवसर मिला। इस दौरान कलाकारों की प्रस्तुति में कई राज्यों की संस्कृति की झलक देखने को मिली। कार्यक्रम का उद्घाटन पद्मश्री ध्रुपद गायक उमाकांत गुंदेचा ने किया।
धनक कार्यक्रम के तहत सांस्कृतिक प्रस्तुतियां दी गईं। वाद्य संगीत के तहत सुप्रसिद्ध संगीतकार मारिस लाजरस के मार्गदर्शन में राजधानी के विभिन्न शासकीय विद्यालयों के विद्यार्थियों ने वैश्विक उत्सव की प्रतीक बाउंडलेस मेलोडीज की प्रस्तुति दी। जिसमें केवल आठ मिनट में अलौकिक अनुभव कराया गया। इसमें वेस्टर्न सिम्फनी, होपाक राशियन, फ्लेमिंगो स्पेन, अरेबियन अरब, कैलिप्सो अफ्रीका, गरबा का समावेश दिखा, जिसे वर्ल्ड हेरिटेज में शामिल किया गया है। मंच पर सरकारी स्कूल के बच्चों ने अपनी प्रस्तुति से समां बांध दिया जो एक प्रोफेशनल बैंड की तरह प्रस्तुति दे रहे थे। इसके लिए उन्हें 12 दिन का प्रशिक्षण दिया गया। बच्चों ने फ्लूट और सिंथेसाइजर पर गिटार, बेस गिटार, ट्रम्पेट, ब्रास, स्टील्ड्रम, अकोर्डियन, वायलिन, संतूर और भी बहुत उपकरण बजाए। वहीं कार्यक्रम में वृंद गान के तहत ख्यात संगीतकार उमेश तरकसवार के निर्देशन में क्लासिक फ्यूजन जुगलबंदी की प्रस्तुति दी गई। इसमें राजधानी की 10 शासकीय शालाओं के 75 विद्यार्थियों ने हिस्सा लिया। इसके बाद कथक नृत्य शैली में शिव वंदना रचना पेश की गई, जिसमें नृत्याभिनय के साथ कथक शैली में भगवान शिव के प्रति भक्ति प्रदर्शित और उनके द्वारा की गई विभिन्न लीलाओं को समाहित किया गया। इस आयोजन में इंदौर के विभिन्न शासकीय विद्यालयों के पचास से अधिक विद्यार्थी ख्यातिलब्ध कथक नृत्यांगना और नृत्य गुरु दीपिका सिंह राठौर के मार्गदर्शन में यह कथक नृत्य पेश किया।
कार्यक्रम की अगली कड़ी में मोहनीअट्टम कुचिपुड़ी विधा की शीर्षस्थ कलाकारों में शामिल वरिष्ठ नृत्य गुरु कविता शाजी के निर्देशन में शासकीय विद्यालयों के लगभग 70 विद्यार्थियों ने मोहनीअट्टम और कुचिपुड़ी नृत्य शैली में दुर्गा स्तुति का मनमोहक प्रदर्शन किया। वहीं, भरतनाट्यम नृत्य में पंच तत्वों, क्षिति, जल, पावक, गगन एवं समीर का वर्णन करते हुए भोपाल की लगभग 15 विभिन्न शासकीय शालाओं की लगभग 70 छात्राओं ने की सहभागिता की है। इस प्रस्तुति की संरचना, कोरियोग्राफी और निर्देशन शिखर सम्मान से विभूषित प्रसिद्ध भरतनाट्यम नृत्य गुरु डा. लता सिंह मुंशी ने किया। वहीं अंतरराष्ट्रीय मंचों के सुप्रसिध्द कला गुरुजन श्वेता देवेन्द्र, क्षमा मालवीय और मिलिंद दाभाड़े के निर्देशन में बच्चों ने फ्यूजन नृत्य आनंदम पेश किया, जिसमें विभिन्न नृत्यों का समावेश रहा। इसके तहत भरतनाट्यम नृत्य से आदिम मंदिरों की सुंदरता, कथक नृत्य शैली से पुराने किलों की भव्यता एवं पश्चिमी नृत्य शैली के माध्यम से मिस्र के ऐतिहासिक पिरामिडों का मनमोहक प्रदर्शन किया जाएगा। इस प्रस्तुति में शहर के अनेक शासकीय विद्यालयों के लगभग 160 विद्यार्थी शामिल रहे। अनुगूंज के सृजन भाग के तहत विभिन्न अभिरुचि कार्यशालाओं का आयोजन हुआ। इसमें अंतरारष्ट्रीय सिरेमिक कलाकार शंपा शाह के मार्गदर्शन में माटीकला कार्यशाला माटी-मूरत और सूरत पर बच्चों ने आकर्षक मुखौटे तैयार किए। वरिष्ठ छायाचित्रकार हेमंत वायंगणकर के मार्गदर्शन में फोटोग्राफी कार्यशाला लैंस व्यू एवं सुप्रसिद्ध चित्रकार शोभा घारे के मार्गदर्शन में चित्रकला कार्यशाला रंग सरोकार का आयोजन किया गया। इन कार्यशालाओं में विद्यार्थियों ने अपनी कल्पनाओं को जो आकार दिए हैं, वे अनुगूंज परिसर में आयोजित प्रदर्शनी में संजोए गए हैं।
कार्यक्रम का तकनीकी और रचनात्मक निर्देशन वरिष्ठ रंगकर्मी कमल जैन ने किया है। अनुगूंज का मंच एक भारत श्रेष्ठ भारत की अवधारणा पर आधारित है। इस मंच का निर्माण उज्जैन के महाकाल लोक के मॉडल पर किया गया है, ताकि दर्शकों को सांस्कृतिक समरसता के साथ एकता का भी अनुभव हो। स्कूल शिक्षा विभाग के अधिकारियों के अनुसार, अनुगूंज केवल एक सांस्कृतिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास की दिशा में एक रचनात्मक प्रयास है। इससे सरकारी स्कूलों के छात्रों को अपनी कला और व्यक्तित्व को निखारने का अवसर मिलेगा, साथ ही मंच पर आत्मविश्वास के साथ अपनी अभिव्यक्ति प्रस्तुत करने की प्रेरणा भी।



