भोपाल: अधिमान्य पत्रकार द्वारा शोशल मिडिया (AI) के माध्यम से प्रतिष्ठा धूमिल ब्लैकमेलिंग एवं आपराधिक षड्यंत्र रचने का मामला, संबंधितों के विरुद्ध कठोर कार्रवाई की मांग…

भोपाल, सं. प्रशांत झिलपे – राजधानी के अधिमान्य वरिष्ठ पत्रकार पंकज सिंह भदौरिया ने अभिषेक जैन नामक व्यक्ति पर सोशल मीडिया के जरिए ब्लैकमेलिंग, बदनाम करने और एआई व डीपफेक तकनीक का इस्तेमाल कर झूठी एवं भ्रामक सामग्री प्रसारित करने के गंभीर आरोप लगाए हैं.
पुलिस कमिश्नर को सौंपे गए शिकायत पत्र में पंकज भदौरिया ने दावा किया है कि अभिषेक जैन नामक व्यक्ति एवं उसके कुछ सहयोगियों द्वारा मेरे विरुद्ध सुनियोजित षडयंत्र रचते हुए सोशल मीडिया एवं अन्य डिजिटल माध्यमों पर एआई (Artificial Intelligence), डीपफेक अथवा अन्य तकनीकी साधनों का उपयोग कर भ्रामक, झूठी, मनगढ़ंत एवं तथ्यहीन सामग्री तैयार कर प्रसारित की जा रही है, जिससे मेरी सामाजिक प्रतिष्ठा, पेशेवर छवि एवं व्यक्तिगत सुरक्षा पर गंभीर प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है।
उक्त व्यक्ति प्रारंभ में मुझसे परिचय स्थापित कर मेरे निकट आया तथा बाद में विभिन्न व्यक्तियों से धनराशि दिलाने के लिए मुझ पर लगातार दबाव बनाने लगा। उसने मुझसे कहा कि मैं कुछ व्यक्तियों से उसके लिए आर्थिक सहायता एवं धनराशि की व्यवस्था कराऊँ। मानवीय आधार पर मैंने अपने परिचितों के माध्यम से उसकी कुछ सहायता करने का प्रयास भी किया, किन्तु जब उसकी मांगें अत्यधिक बढ़कर लाखों रुपये तक पहुँच गईं तो मैंने स्पष्ट रूप से किसी भी प्रकार का सहयोग करने से इंकार कर दिया।
मेरे द्वारा सहयोग से इंकार किए जाने के पश्चात अभिषेक जैन एवं उसके सहयोगियों ने दुर्भावनावश मुझे बदनाम करने, मेरी सामाजिक एवं व्यावसायिक प्रतिष्ठा को क्षति पहुँचाने तथा मानसिक रूप से प्रताड़ित करने के उद्देश्य से सोशल मीडिया प्लेटफॉर्मों पर मेरे संबंध में असत्य, भ्रामक एवं मनगढ़ंत सामग्री प्रसारित करना प्रारंभ कर दिया। उक्त सामग्री में एआई, डीपफेक अथवा अन्य तकनीकी माध्यमों का उपयोग किए जाने की प्रबल संभावना है. जिसकी वैज्ञानिक एवं तकनीकी जांच कराया जाना अत्यंत आवश्यक है।
मुझे यह भी आशंका है कि उक्त व्यक्ति एवं उसके सहयोगी मेरी प्रतिष्ठा धूमिल करने के अतिरिक्त मुझे ब्लैकमेल करने, अनुचित दबाव बनाने, आर्थिक अथवा अन्य प्रकार का लाभ प्राप्त करने तथा मेरे विरुद्ध किसी गंभीर आपराधिक घटना को अंजाम देने की साजिश भी रच सकते हैं। उनके कृत्यों एवं गतिविधियों से मुझे तथा मेरे परिवार को जान-माल की सुरक्षा के संबंध में गंभीर भय एवं आशंका उत्पन्न हो गई है।
अतः उक्त प्रकरण की निष्पक्ष, विस्तृत एवं उच्चस्तरीय जांच कराई जाए तथा सोशल मीडिया पर प्रसारित ऑडियो, वीडियो, पोस्ट, संदेश, स्क्रीनशॉट, पेट, रिकॉर्डिंग एवं अन्य डिजिटल सामग्री की साइबर फॉरेंसिक जांच कराई जाए, साथ ही संबंधित आरोपियों के कब्जे से मूल मोबाइल फोन, कंप्यूटर, लैपटॉप, हार्ड डिस्क, मेमोरी डिवाइस, क्लाउड स्टोरेज, सोशल मीडिया अकाउंट एवं अन्य इलेक्ट्रॉनिक उपकरण विधिवत जप्त कर उनकी फॉरेंसिक जांच कराई जाए, ताकि यह सत्यापित किया जा सके कि प्रसारित सामग्री वास्तविक है अथवा कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI), डीपफेक तकनीक अथवा अन्य तकनीकी माध्यमों से तैयार, परिवर्तित अथवा संपादित की गई है।
यह भी जांच की जाए कि संबंधित ऑडियो, वीडियो, रिकॉर्डिंग अथवा डिजिटल सामग्री कब, किस स्थान पर, किस उद्देश्य से, किन परिस्थितियों में तथा किन व्यक्तियों द्वारा तैयार एवं प्रसारित की गई। विशेष रूप से यह पता लगाया जाए कि उक्त रिकॉर्डिंग अथवा सामग्री का मूल स्रोत क्या है. इसे रिकॉर्ड करने का उद्देश्य क्या था तथा इसके प्रसारण के पीछे आरोपियों की मंशा मेरी मानहानि करना, ब्लैकमेल करना, आर्थिक अथवा अन्य अनुचित लाभ प्राप्त करना, मानसिक प्रताड़ना देना अधवा मेरे विरुद्ध आपराधिक षड्यंत्र को अंजाम देना तो नहीं था।
साथ ही आरोपियों द्वारा प्रसारित अथवा प्रस्तुत किए गए किसी भी ऑडियो, वीडियो, स्क्रीनशॉट, चैट, सोशल मीडिया पोस्ट अथवा अन्य इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड के संबंध में भारतीय साक्ष्य अधिनियम के प्रासंगिक प्रावधानों के अनुरूप धारा 658 का प्रमाणपत्र (Certificate relating) to Electronic Evidence) प्रस्तुत कराने हेतु निर्देशित किया जाए तथा यह सत्यापित किया जाए कि संबंधित इलेक्ट्रॉनिक सामग्री किस मूल स्रोत (Original Source Device) से प्राप्त हुई, किस उपकरण में संग्रहीत थी तथा उसमें किसी प्रकार की एडिटिंग, मॉर्किंग, एआई जनरेशन, डीपफेक अधवा अन्य तकनीकी छेड़छाड़ तो नहीं की गई।
यदि आरोपी अथवा संबंधित व्यक्ति उक्त इलेक्ट्रॉनिक सामग्री के संबंध में मूल डिवाइस, मूल स्रोत अथवा वैधानिक 658 प्रमाणपत्र प्रस्तुत करने में असफल रहते हैं, तो इस तथ्य को भी जांच में सम्मिलित कर विधि अनुसार आवश्यक कार्रवाई की जाए। प्रथम दृष्ट्या आरोपियों के कृत्य भारतीय न्याय संहिता, 2023 की धारा 61 (आपराधिक षड्यंत्र), धारा 351 (आपराधिक धमकी), धारा 352 (जानबूझकर अपमान), धारा 356 (मानहानि), धारा 308 (उगाही/ब्लैकमेलिंग से संबंधित प्रावधान, यदि जांच में प्रमाणित हो), सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, 2000 तथा अन्य प्रासंगिक साइबर अपराध संबंधी विधिक प्रावधानों के अंतर्गत दंडनीय प्रतीत होते हैं। जांच के दौरान जो अन्य धाराएं लागू पाई जाएं, उन्हें भी प्रकरण में सम्मिलित किया जाए।
अतः आरोपियों के विरुद्ध विधि अनुसार अपराध पंजीबद्ध कर कठोरतम वैधानिक कार्रवाई की जाए, उनके डिजिटल उपकरणों एवं इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों को सुरक्षित कर फॉरेंसिक परीक्षण कराया जाए, साक्ष्यों के साथ किसी प्रकार की छेड़छाड़ रोकने हेतु आवश्यक कदम उठाए जाएं तथा मुझे एवं मेरे परिवार को आवश्यक सुरक्षा प्रदान की जाए।
आरोपियों के विरुद्ध मैं जांच में पूर्ण सहयोग प्रदान करने हेतु तैयार हूँ तथा आवश्यक दस्तावेज, डिजिटल साक्ष्य, स्क्रीनशॉट, लिंक एवं अन्य उपलब्ध सामग्री जांच एजेंसी को उपलब्ध कराने के लिए प्रस्तुत हूँ।



