संपादकीय

बात कड़वी है पर शराब से ज्यादा जहरीली नहीं…

बात कड़वी है पर शराब से ज्यादा जहरीली नहीं…

मध्यप्रदेश में बीते वित्तीय वर्ष के दौरान शराब के कारण हजारों मौतें हुई है सबसे चौंकाने वाली बात है कि मैं अधिकांश युवा है वहीं कुछ ऐसे भी लोग हैं जो पूरी तरह की से स्वस्थ नजर आते थे अपने स्वास्थ्य के प्रति चिंतित रहते थे इसके बावजूद भी उनके अचानक से काल के गाल में समा जाना कहीं ना कहीं चिंता का विषय है और व्यवस्था पर सवाल चलिए अब हम बात करते हैं कि ऐसा क्यों किसी शराब कंपनी का नाम लिए बगैर हम आपको बताते हैं कि असली पैकिंग में नकली मिलावटी शराब लगातार बेची गई इतना ही नहीं इसमें ब्रांडेड सैनिटाइजर भी मिलाए गए जिसके चलते जाने अनजाने में लोगों का स्वास्थ्य लगातार बिगड़ चला गया कुछ शराब कंपनियों की आपसी प्रतिस्पर्धा और ज्यादा से ज्यादा पैसा कमाने की लालच में शराब की क्वालिटी को जहर में तब्दील कर दिया ऐसे एक नहीं कई उदाहरण है आपके मोहल्ले में आपके शहर में आपके जिले में कई बार आपको सूचना है मिली होगी कि फलाना व्यक्ति नहीं रहा जब आप उनके यहां पहुंचे होंगे तो आदतन शराबियों के घर वालों ने यह कहकर बात को संभाल लिया होगा कि अचानक से सीने में दर्द उठा और अस्पताल ले जाने से पहले ही प्राण निकल गए पर सच्चाई यह है की शराब में मिला सैनिटाइजर पेट की नसों को इतनी बुरी तरीके से प्रभावित करता गया की शराब की शौकीनों की भूख खत्म होती गई लगातार कमजोरी थकान और अचानक से मौत और अब प्रश्न उठता है आबकारी महकमे पर वह इसलिए की सरकार को शराब कंपनी के ठेकेदारों से राजस्व के रूप में एक बड़ी मोटी रकम प्राप्त होती है सरकार के अधीनस्थ आबकारी विभाग को चाहिए कि उसके लिए जो व्यवस्था और नियम है उनका पालन करवाए लेकिन शराब कंपनियों के ठेकेदार को कामना है तो आबकारी विभाग को भेंट भी चढ़ाना जरूरी है और यही सिलसिला मासूम लोगों की जान से खिलवाड़ कर रहा है अब देखना होगा कि नए वित्तीय वर्ष में कितने मासूम अनजान और सुरा प्रेमी शराब कंपनियों के पैसे कमाने की लालच में अपनी जान से हाथ धो बैठेंगे.

  • लेखक – अभय मरकले

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