मध्य प्रदेश

भोपाल: महिला बिल आरक्षण को लेकर कांग्रेस की राष्ट्रीय प्रवक्ता डॉ. रागिनी नायक ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर किया मोदी सरकार पर कडा प्रहार…

भोपाल, सं. प्रशांत झिलपे – अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी की राष्ट्रीय प्रवक्ता डॉ रागिनी नायक बसोया ने मंगलवार को भोपाल प्रदेश कांग्रेस मुख्यालय के राजीव गांधी सभागार में महिला बिल आरक्षण विषय पर प्रेस को संबोधित करते हुए कहा कि जब देश की ‘आधी आबादी’, ‘नारी शक्ति, भारत मां की बेटियां मौत को हरा कर जीवन दे सकती हैं तो संघ-भाजपा और मोदी की महिला विरोधी मानसिकता भला किस खेत की मूली है?

शुरुआत में ही मैं कह देना चाहती हूँ कि ‘आधी आबादी’ आरक्षण का अपना पूरा हक मोदी सरकार से ले कर रहेगी चाहे मोदी जी राह में कितने भी रोड़े क्यों ना अटका दें, किन्तु-परन्तु अगर-मगर की कितनी भी शर्तें क्यों ना लगा दें, ज़िद हैं ये कांग्रेस पार्टी की, खड़गे की, राहुल की, ज़िद है प्रियंका गाँधी की, कि हम महिलाओं को 33% आरक्षण दिलवा कर रहेंगे। यही नहीं दलित समाज से, आदिवासी समाज से, पिछड़े वर्ग से आयी अपनी बहनों को भी आरक्षण के अधिकार से वंचित नहीं होने देंगे।

प्रवक्ता रागिनी नायक ने कहा कि 17 अप्रैल 2026 का दिन ऐतिहासिक है इस दिन देश को विभाजित करने के मोदी सरकार के खतरनाक मनसूबों पर विपक्ष की एकता ने पानी फेर दिया, ये संविधान और लोकतंत्र की जीत का दिन है, भारत की एकता और अखंडता की जीत का दिन है। और में स्पष्ट कर देना चाहती हूँ कि संसद में महिला आरक्षण का बिल नहीं गिरा है, ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम’ तो 2023 में ही सर्वसम्मति से पारित हो गया था, वो आज भी कानून है, बस मोदी जी उसे लागू नहीं होने दे रहे हैं। महिला आरक्षण के प्रति मोदी सरकार की गंभीरता इसी बात से समझ आ जाती हैं कि 3 साल पहले पारित बिल की अधिसूवना मोदी सरकार 16 अप्रैल 2026 को रात 9.55 पर जारी करती है यानि महिला आरक्षण को ताक पर रख कर मोदी सरकार 3 साल तक चादर तान कर सोती रहती है और अचानक तमिलनाडु और पश्चिम बंगाल के चुनाव के बीच नींद से जाग कर विशेष सत्र बुलाती है।

कांग्रेस प्रवक्ता रागिनी नायक ने कहा संसद में महिला आरक्षण का बिल नहीं गिरा है, देश को खंडित करने के लिए जो संविधान संशोधन का विधेयक लाया गया, वो गिरा है। महिला आरक्षण तो बहस का मुद्दा ही नहीं है. हम तो मांग कर रहे हैं कि 543 सीटों पर महिला आरक्षण आज ही हो जाए और हमारे पिछड़े वर्ग की बहनों को भी उसमें 1/3 जगह मिले। पर ऐसा परिसीमन जिससे दक्षिण के राज्यों की, उत्तर पूर्वी राज्यों की. छोटे राज्यों की ‘हिस्सा चोरी हो, जिससे दलित, आदिवासी, पिछड़े वर्ग की महिलाओं की हिस्सा चोरी हो वो हम नहीं होने देंगे। सोनिया गांधी जी ने अपने लेख में कहा कि जब भी ऐसा परिसीमन हो जिससे लोकसभा की सीटें बढ़े तो उसमें सभी प्रदेशों की हिस्सेदारी राजनैतिक निष्पक्षता से होनी चाहिए ना कि केवल अंक गणित के हिसाब से।

मोदी जी कहते हैं कि विपक्ष की जियत में खोट है, संविधान का 73वें और 74वें संशोधन कर के राजीव गांधी जी की सरकार पंचायत और Local Bodies के चुनाव में महिलाओं के लिए 33% आरक्षण ले कर आयी जिसके चलते आज निगम में और पंचायतों में 15 लाख से ज्यादा चुनी हुई महिलाएँ हैं। 1989 में जब राजीव गांधी बिल ले कर आए तो 4 बड़े भाजपायी नेताओं ने विरोध में वोट किया अटल बिहारी वाजपेयी, लालकृष्ण आडवानी, जसवन्त सिंह और राम जेठमलानी, संधी-भाजपायी कल भी महिला विरोधी थे, आज भी हैं और कल भी रहेंगे, सोनिया गांधी, मनमोहन सिंह के नेतृत्व में UPA 2010 में राज्यसभा में महिला आरक्षण बिल लायी और उसे पारित करवाया। लोकसभा में हमारे पास संख्या बल नहीं था इसलिए हम बिल पास नहीं करवा पाए लेकिन 10 साल पुर्ण बहुमत वाली मोदी सस्कार की क्या मजबूरी थी कि महिला आरक्षण लागू नहीं करवा पाए???

* महिला समता, समानता, सशक्तिकरण और सम्मान को ले कर अगर किसी की नीति और नियत में स्वोट है तो वो सिर्फ और सिर्फ मोदी सरकार है-

* अगर मोदी जी की नियत साफ होती तो जब 2018 में जब सहुल गांधी जी ने मोदी जी को चिट्ठी लिख कर 2019 से महिला आरक्षण लागू करने की माग की थी और पूरण समर्थन का वाता किया था. यो मोदी जी 2019 से महिला आरक्षण लागू करवाते!

* अगर गोटी जी की नियत साफ होती तो 2023 में सर्व सम्मति से पारित ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम को ‘जनगणना और परिसीमन की बैसाखियों पर 2014 तक नहीं लटकाते।

* अगर मोदी जी की नियत साफ होती तो महिला आरक्षण की आज में परिसीमन को हथियार बना कर अपने सियासी फायदे के लिए देश की एकता और अखंडता पर प्रहार ना करते।

* अगर मोदी जी की नियत साफ़ होती तो दो प्रदेशों के चुनाव के बीच में विशेष सत्र बुलाने के बजाए 29 अप्रैल के बाद सर्व दलीय बैठक बुलाते, देश के सभी मुख्यमंत्रियों और जन-प्रतिनिधियों की राय लेते. विपक्ष से संवाद स्थापित कर आम राय बनाने का प्रयास करते !

* अगर मोदी जी की नियत साफ होती तो कांग्रेस की मांग कि अभी 543 सीट पर ही महिला आरक्षण लागू करिए और SC/ST और OBC महिलाओं की हिस्सेदारी भी सुरक्षित करिए, मोदी जी ने सहर्ष मान ली होती!

पर इसके ठीक विपरीत, अपने कुकर्मों और विफलताओं का ठीकरा आज मोदी जी कांग्रेस पर फोडना चाहते हैं, वो भूल जाते हैं कि इस देश की महिलाएँ कितनी समझदार हैं। देखिए, श्री रामचरितमानस में गोस्वामी तुलसीदास जी ने प्रभु श्री राम के लिए लिखा कि

निर्मल मन जज सो मोही पाचा

मोहि कपट छल छिद्र ना भावा

और यही भाव संसद में प्रियंका गांधी जी ने देश की महिलाओं की ओर से व्यक्त किया कि महिलाएँ तुरन्त भाप जाती हैं कि कौन उनके साथ छल-कपट कर रहा है, कौन बहानेबाजी और जुमलेबाजी कर रहा है, कौन उनके सम्मान और उनके अधिकार के साथ खिलवाड़ कर रहा है। सही कहा मोदी जी ने कि महिलाएँ अपना अपमान कभी नहीं भूलती। इस देश की महिलाएँ कैसे भूल सकती हैं कि….

जब मणिपुर में दो बेटियों के शरीर को हैवानों द्वारा नोचा जा रहा था

जब हाथरस की बेटी को बलात्कार के बाट पेट्रोल छिड़क कर आधी रात को फूंका जा रहा था

जब उन्नाव में भाजपा का विधायक एक मासूम का सामूहिक बलात्कार कर, उसके परिवार की हत्या कर रहा था

जब बिलकिस बानो के दोषियों को भाजपा के माला पहना कर स्वागत कर रहे थे

जब अंकिता भडारी के लिए न्याय की गुहार लगाने पूरा उत्तराखंड सड़को पर उतर आया था

जब देश की शान पहलवान बेटियों को पुलिस बाल पकड़ कर घसीट रही थी

जब लखीमपुर में निर्वाचित महिला नेता का चीरहरण हो रहा था तब इस देश का प्रधानमंत्री मुँह पर ताला लगाए तमाशा देख रहा था और भाजपायी दोषियों को संरक्षण दे रहा था !

महिलाएँ अपना अपमान कभी नहीं भूलती गोदी जी। कांग्रेस को महिला विरोधी कहने से पहले अपने गिरेबान में झांक कर देखिए। आप कांग्रेस की तत्कालीन अध्यक्ष, UPA की वेयस्परसन, शहीद प्रधानमंत्री की धर्मपत्नी को ‘कांग्रेस की विधवा कहते हैं, एक सांसद की अर्धागिनी को 50 करोड़ की गर्लफ्रेन्ड’ कहते हैं, एक महिला सांसद की तुलना सूर्पनखा से करते हैं और एक महिला मुख्यमंत्री का ‘दीदी-ओ-दीदी कह कर मजाक उड़ाते हैं, आप प्रजव्वल रेवन्ना जैसे Serial Rapist के लिए वोट मांगते.

आपके 240 सांसदों में से मात्र 31 महिलाएँ हैं यानि केवल 12.9% जबकि संसद की औसत 13.6% हो आपके 1,654 विधायकों में से मात्र 164 महिलाएं हैं। आपके 21 मुख्यमंत्रियों में से बमुश्किल एक महिला मुख्यमंत्री है। आपके 72 केंद्र सरकार के मंत्रियों में मात्र सात महिलाएं हैं। आपके 54 सांसदों और विधायकों पर सीरियस क्राइम, जिसमें हत्या और बलात्कार के आरोप हैं उनका नाम वहा पर अंकित हैं। यहाँ तक की Epstien के परम मित्र हरदीप पुरी भी आपकी कैबिनेट का हिस्सा हैं। आप से महिला सम्मान की क्या ही उम्मीद की जा सकती हैं? पर याद रखिए जिनके घर शीशे के हो उन्हें दूसरों पर पत्थर नहीं फेंकने चाहिए.

अंत में मैं कहना चाहती हूँ कि परसों मोदी जी ने राष्ट्र के नाम संदेश दिया। ये कहा जाता है-

मुखिया मुख सो चाहिए, खान-पान को एक.

पालै पोसै सकल अंग, तुलसी सहित विवेक..

देश की अपेक्षा थी कि मोदी जी राष्ट्र के नाम संदेश’ में एक मुखिया, एक अभिभावक की तरह बात करते। ‘महिला आरक्षण’ को लागू कराने का सस्कार का Plan of Action बताते, महिलाओं के सशक्तिकरण और अधिकारों की बात करते, विपक्ष से संवाद और समन्वय स्थापित करने की बात कस्तो लेकिन उन्होंने तो कांग्रेस के खिलाफ रुदन और विलाप के अलावा कुछ नहीं किया 29 मिनट के भाषण में 58 बार कांग्रेस का नाम लिया और कोसा। 12 साल से देश की सस्कार वलाने वाले प्रधानमंत्री की ऐसी लाचारी, ऐसी कमज़ोरी और ऐसा नकारात्मकता बहुत ही निराशाजनक हैं। कांग्रेस से उनका इतना भयाक्रांत होना, इतना खौफजदा होना भी बहुत चिंताजनक है।

मोदी जी एक मौका और है आपके पास। यदि आप सच में चाहते हैं कि आपकी महिला विरोधी छवि में थोडा सुधार हो को कांग्रेस की ये मांग स्वीकार कीजिए कि 543 सीटों में ही महिलाओं को आरक्षण दिया जाए। आने वाले मनसून सत्र में ये कानून लागू हो। पिछड़े वर्ग की महिलाओं को भी 13 हिस्सेदारी मिले। कांग्रेस आपको पूर्ण समर्थन देगी। लेकिन यदि आप समझते हैं कि जनता की आँखों में महिला आरक्षण को नाम की धूल झोंक कर, विभाजनकारी परिसीमन करवा लेंगे, तो अपनी गलतफहमी दूर कर लीजिए।

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