मध्य प्रदेश

भोपाल: माँ भवानी चौक सोमवारा पर अखिल भारतीय कवि सम्मेलन में देशभक्ति, भक्ति और स्वाभिमान की गूँज, देशभर के कवियों ने काव्यपाठ से श्रोताओं को किया मंत्रमुग्ध…

अक्षत कुमकुम राष्ट्रभक्ति श्रद्धा के दीप जलाना है,
देश है भारत माँ का मंदिर मिलकर इसे बचाना है।

भोपाल, होली, रंगपंचमी तथा हिंदू नववर्ष नव संवत्सर और गुड़ी पड़वा के पावन अवसर पर सोमवारा स्थित माँ भवानी चौक पर श्री हिंदू उत्सव समिति द्वारा भव्य अखिल भारतीय कवि सम्मेलन का आयोजन किया गया। इस साहित्यिक आयोजन में देशभर से पधारे प्रतिष्ठित कवियों ने अपनी ओजस्वी, भावपूर्ण और रसपूर्ण रचनाओं का काव्यपाठ कर श्रोताओं को देर रात तक मंत्रमुग्ध किए रखा। देशभक्ति, भक्ति, स्वाभिमान और सामाजिक चेतना से ओतप्रोत कविताओं पर उपस्थित श्रोताओं ने जमकर तालियाँ बजाकर कवियों का उत्साहवर्धन किया।

कार्यक्रम का शुभारंभ दीप प्रज्ज्वलन एवं माँ सरस्वती की वंदना के साथ हुआ। इसके पश्चात श्री हिंदू उत्सव समिति के अध्यक्ष चंद्रशेखर तिवारी तथा कार्यक्रम के संयोजक एवं समिति के वरिष्ठ उपाध्यक्ष अनिल तिवारी ने आमंत्रित कवियों का पुष्पमालाओं से स्वागत कर सम्मान किया।

कवि सम्मेलन में कवि शशिकांत यादव ‘शशि’ ने राष्ट्रभक्ति से ओतप्रोत अपनी रचना प्रस्तुत करते हुए कहा—
“आजादी की आग थी जो अंतस में जाग उठी,
जाग उठी ज्वाला जागी देश की जवानी थी।
पीठ पर बंधा था लाल, शौर्य से सजा था भाल,
भाल देश का न झुके बात की दिवानी थी।”
उनकी ओजपूर्ण प्रस्तुति ने श्रोताओं में देशभक्ति का संचार कर दिया।

कवि राम भदावर ने स्वाभिमान और संघर्ष की भावना को व्यक्त करते हुए कहा—
“राहों में यदि शुक्ल बिछे हों तो पत्थर बोना पड़ता है,
स्वाभिमान पे आँच आए तो कट्टर होना पड़ता है।”

रीवा से आए कवि अमित शुक्ला ने प्रभु श्रीराम पर आधारित अपनी भावपूर्ण रचना से सभागार में भक्ति का वातावरण बना दिया। उन्होंने कहा—
“कहानी राम की मेरे कोई प्यारी ना बन जाए,
हमारे राम का मंदिर चमत्कारी ना बन जाए।
चरण जब भी पड़े थे प्रभु के मंदिर में तो ये डर था,
शिलाएँ पैर से छूकर कहीं नारी ना बन जाए।”

सूर्यकांत चतुर्वेदी ने अपने तीखे व्यंग्य और सामाजिक चेतना से परिपूर्ण काव्यपाठ से श्रोताओं को सोचने पर विवश कर दिया। उन्होंने कहा—
“सत्य समर का जीवित योद्धा सदा युद्ध लड़ता है,
और बौना किरदार सदा ही चक्रव्यूह गढ़ता है।”

वहीं प्रसिद्ध कवयित्री कविता तिवारी ने प्रभु श्रीराम की भक्ति में डूबी अपनी रचना सुनाते हुए कहा—
“भक्ति क्या है बताने आयेंगे,
प्रेम वन से जताने आयेंगे,
भीलनी की तरह पुकारो तो,
राम फिर बेर खाने आयेंगे।”

कवियों की इन उत्कृष्ट प्रस्तुतियों ने वातावरण को साहित्य, संस्कृति और राष्ट्रभावना से सराबोर कर दिया। देर रात तक चले इस भव्य कवि सम्मेलन में बड़ी संख्या में साहित्य प्रेमी, गणमान्य नागरिक एवं युवा उपस्थित रहे और काव्य की इस अविस्मरणीय संध्या का आनंद लिया।

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